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रुद्रप्रयाग के मयाली के पास जंगल में भयंकर आग: 30 दिसंबर 2025 को सर्दी में फिर सुलगाई चिंता | Rudraprayag Mayali Forest Fire: Winter Blaze on Dec 30 Sparks Alarm in Uttarakhand


दोस्तों, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 30 दिसंबर 2025 को एक बार फिर जंगल की आग ने सबको चौंका दिया। तिलवाड़ा-जखोली रोड पर मयाली के पास, ठंड के इस मौसम में जंगल धधक उठा। ये आग न सिर्फ लोकल लोगों को परेशान कर रही है, बल्कि पूरे पहाड़ी इलाके में पर्यावरण की चिंता बढ़ा रही है।

Incident Details

ये आग 30 दिसंबर 2025 को दोपहर के आसपास लगी, जैसा कि लोकल रिपोर्ट्स में बताया गया है। जगह है रुद्रप्रयाग का तिलवाड़ा-जखोली मार्ग, मयाली से करीब 2 किलोमीटर पीछे का जंगल। वीडियो में साफ दिख रहा है कि जंगल धू-धू कर जल रहा है, लपटें ऊंची उठ रही हैं और धुआं चारों तरफ फैल गया। इसमें कोई इंसानी जानमाल का नुकसान नहीं बताया गया, लेकिन जंगल का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। क्रेडिट जाता है केदार टाइम्स के वीडियो को, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

Reason

इस आग के पीछे मुख्य वजह है बर्फ न गिरना और नमी की कमी, जिससे जंगल बेहद शुष्क हो गए हैं। दिसंबर में ही उत्तराखंड में कई जगहों पर ऐसी आगें लग रही हैं – जैसे यमुना घाटी और टौंस वन प्रभाग में। ETV भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 16 लोकेशन्स पर फायर स्पॉट्स पकड़े गए, जो ठंड के बावजूद हो रहे हैं। ये क्लाइमेट चेंज और ह्यूमन नेग्लिजेंस का नतीजा लगता है, क्योंकि पिछले हफ्तों में भी 1900 से ज्यादा वॉर्निंग्स आई हैं। प्लस, भालू और गुलदार जैसे जानवरों का बढ़ता आतंक भी आग की घटनाओं को ट्रिगर कर सकता है, जैसा कि वन विभाग पहले से बता चुका है।

Official Statement

लोकल लोगों और आईविटनेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके अलर्ट किया, खासकर कुमाऊं जागरण जैसे हैंडल्स ने। वन विभाग की तरफ से अभी कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया, लेकिन वो पहले से ही इन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट्स और विन्टर फायर्स को लेकर चिंतित थे। अमर उजाला की रिपोर्ट में कहा गया कि डिपार्टमेंट को ऐसे रिस्क्स का अंदाजा था, और वो एक्टिव मोड में हैं। अगर जल्दी कंट्रोल न किया गया, तो ये फैल सकती है।

Conclusion

अभी तक आग कंट्रोल में लाने की कोई अपडेट नहीं मिली, लेकिन रुद्रप्रयाग के जंगल में ये खतरा बना हुआ है। वन विभाग की टीम्स शायद मौके पर हैं, और इन्वेस्टिगेशन चल रही होगी। आने वाले दिनों में अगर बर्फबारी न हुई, तो 2026 का फायर सीजन और बुरा हो सकता है – हजारों हेक्टेयर जंगल, वन्यजीव और लोकल इकोसिस्टम को नुकसान। हमें सिस्टम पर प्रेशर डालना होगा ताकि प्रिवेंटिव मेजर्स स्ट्रॉन्ग हों। ये हादसा एक रिमाइंडर है कि पहाड़ों की सेहत हमारी जिम्मेदारी है।

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